२.के.एल.सेहगल: उनके जीवन के कुछ खास अंतरंग किस्से
के.एल.सेहगल:
उनके जीवन के कुछ खास अंतरंग किस्से
१. के.एल.सेहगल साहब की लोकप्रियता, उनके जमाने मे इतनी थी की लोग उनको पागलोंकी तरहा पूजते थे, उनके गानोके दीवाने थे। ये कहानी या वाक्या कही पढ़ने सुनने में आया था
एकबार के.एल.सेहगल साहब कही से लौट रहे थे, शाम घिर चुकी थी करीब शाम ७ बजे का समय होगा, उनको एक रेलवे फाटक क्रॉस करना था, फाटक गिरा हुआ था, शायद कोई गाड़ी गुजरनेवाली होगी। उन्होंने अपने ड्राइवर से कहा कि ",तुम गाड़ी लेकर आओ, मैं पैदल क्रॉस कर लेता हूँ। सेहगल साहब पैदल चलकर फाटक के उस पार चले गए, और तब उन्होंने सुना कि कोई उनका ही गाना गा रहा है "जब दिल ही टूट गया, हम जी के क्या करेंगे? सेहगल साहब ने देखा कि आसपास कोई है नही और वो गीत बड़े ही खूबसूरत तरीके से गा रहा है!! उन्होंने आवाज़ की तरफ ध्यान देकर कहा "अरे भाई कौन हो तुम यू छुपछुपकर क्यो गा रहे हो? मेरे सामने आकर गाओ" सामने एक पेड़ था, उस पेड़ के पीछेसे आवाज़ आई "नही साहब मैं आपके सामने नही आ सकता हु क्यूंके मैं मर चुका हूँ!! मुझे अपनी प्रेमिका से धोका मिला था और यहा इसी फाटक पर कटकर मैंने अपनी जान दे दी थी" "मैं जीवनभर आपका बहोत बड़ा प्रशंसक रहा हूँ, यदि आप यह गीत मेरे लिए गा दे तो मेरी प्रेतयोनि से मुक्ति हो जायेगी" और सेहगल साहब ने अपनी दर्दभरी आवाजमें यह गीत उस शाम को उस मृत व्यक्ति को सुनाया, वातावरण में एक गज़ब सा माहौल बन गया उस शाम की तन्हाई में!! और जैसे ही गीत पूरा हुआ, उन्होंने पाया के उनके पैरों के पास कुछ वस्तु गिरी, उन्होंने झुककर जब उठाया तो पाया कि वो एक अंगूठी थी। सुनने में आता है कि वो अंगूठी सेहगल साहब हमेशा अपने हाथोंमें पहनकर रखते थे। (महान लोगोंके बारेमें ऐसी कई कहानियां उनके जीवनकालमे बन जाती है, जो अधिकतर उनके पागल से, दीवाने से प्रशंसकों की मनघडंत ही होती है)
२. इसी गीत से जुड़े कई किस्से है उनमें से ये भी एक है, इस गीत का रेकॉर्डिंग होनेवाली थी, सहगल साहब अपने घर से तैयार होकर स्टुडिओ जाने ही वाले थे कि, डाकिया एक तार(टेलीग्राम) लेकर पहुचा, जो उनके गांवसे आया था। तार में उनकी माता के निधन का संदेशा था, सहगल साहब को बड़ा आघात लगा यह जानकर, कुछ मिनटों तक वो गुमसुम बैठे रहे। फिर सोचा कि स्टुडिओ जाना जरूरी है अन्यथा प्रोड्यसर का नुकसान हो जाएगा। वो स्टुडिओ पहोचे जहाँ महान संगीतकार नॉशद के गाने की रोकर्डिंग के लिए तैयार थे, सहगल साहब ने वहाँ स्टुडिओ में मौजूद सभीको माता के मृत्यु की खबर दी, कुछ लोगोने रेकॉर्डिंग केंसल करने की बात कही पर सहगल साहब ने ना कहा और उसी दिन रेकोरिंग हुई, उन दिनों सहगल साहब शराब पी कर ही गाते थे, पर नॉशद जी की बिनती पर उस दिन गाना बिना शराब पिए पूरा रेकॉर्ड हुआ...और गाना था "जब दिल टूट गया, हम जी के क्या करेंगे, जब दिल ही टूट गया।
३. इसी गीत के बारेमें गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने अपने एक इंटरव्यूमें यह किस्सा सुनाया था....मजरूह सुल्तानपुरी अपने गीतों के लिए बड़े ही मशहूर थे,और उनको बड़े बड़े पुरस्कार मिले है। पर उनके हिसाब से उनका सबसे बड़ा पुरस्कार ये था कि, के.एल.सेहगल ने अपने विल (इच्छा-पत्र) में यह लिखवाया था कि उनकी जब मृत्य हो तब अंतिम यात्रा के दरमियान ये गाना बजते रहना चाहिए। जब उनकी मृत्यु हुई तो उनकी इच्छा के मुताबिक यह गाना अंत बजता रहा था "जब दिल टूट गया, हम जी के करेंगे"
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